दुःखद खबर:- बच्चों के साथ आंगन में खेल रही 7 वर्षीय बच्ची को उठा ले गया गुलदार ।

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अल्मोड़ा:- उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौत का सबब बन रहे जंगली जानवरों के प्राणघातक हमले इस वर्ष कुछ अधिक ही देखने को मिल रहे है। मासूम समेत कई लोगों की जिंदगीयों पर विराम लगाने के बाद एक बार फिर गुलदार के हमले में एक और नन्ही जान को मौत मिली है।
घटना अल्मोड़ा जनपद के भिकियासैंण क्षेत्र की है जहां घर से महज कुछ ही दूर खेल रही 7 वर्षीय बच्ची को आदमखोर गुलदार ने मौत के घाट उतार दिया है मासूम का शव पास के जंगल से बरामद किया गया। बेटी की मौत से परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है मां मासूम की विरह वेदना में तड़प रही है।
मामला बीते शनिवार शाम का है जब अल्मोड़ा जनपद के भिकियासैंण क्षेत्र के बराहकोट निवासी गिरीश सिंह बिष्ट की 7 साल की मासूम बेटी दिव्या शाम के तकरीबन छह बजे घर से कुछ ही दूर अपने अन्य दोस्तों संग खेल रही है. तभी वहां घात लगाए बैठे गुलदार पलक झपकते ही मासूम को दबोच कर जंगल ही तरफ ले गया. दिव्या के चीखने चिल्लाने की आवाज सुन कर ग्रामीण घटना स्थल पर पहुंचे मगर तब तक नरभक्षी गुलदार मासूम को ग्रामीणों की नजर से काफूर कर चुका था. इस घटना के दौरान अन्य मासूम भी बाल बाल बचे.
हैरान परेशान ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी. मौके पर पहुंचे वनाधिकारियों ने मासूम की खोजबीन शुरू की, करीबन डेढ़ घंटे बाद नन्ही दिव्या का लहूलुहान शरीर पास के जंगल में मिला. दिव्या के अदखाई लाश को जब गांव लाया गया तो हर किसी के आंखो से आंसू झलकने लगे. बेटी की छत विछत शव को देख मां बदहवास हो गई. मासूम का पूरा परिवार सदमे है तथा क्षेत्र में मातम का माहौल है।
गुलदार के हमले में जान गवाने वाली दिव्या परिवार की लाडली थी. वह दूसरी कक्षा में पढ़ती थी. मासूम के पिता गिरीश सिंह बिष्ट जो कि दिल्ली के एक निजी कम्पनी में काम करते है उन्होंने अपनी मासूम के लिए कई सपने संजोए थे जो कि पल भर में ही हमेशा के लिए टूट चुके है. हादसे के समय दिव्या की मां खेतों में गई थी जबकि उसके दादा दादी घर में ही थे।
शोक के लहर में डूबे गांव के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट किया है उन्होंने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के साथ साथ आदमखोर गुलदार को जल्द ही ढेर करने की मांग उठाई है।



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